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हॉकी की दुर्दशा
akshat saxena | 03 Mar 2008

हिंदुस्तान में जहा का रास्ट्रीय खेल है तो हॉकी पर तवज्जो मिलती है क्रिकेट को आखिर मिले भी क्यों न क्रिकेट ने दिया भी तो है हिंदुस्तान को एक पहचान पूरे विश्व में आज हिंदुस्तान क्रिकेट के नाम से जाना जाता है लेकिन वही पर हॉकी के खिलाड़ी आज तक ऐसा कुछ नही कर पाए जिस से उनको कोई पूछे इसे अब हिंदुस्तान का दुर्भाग्य ही कहेंगे की हिंदुस्तान का रास्ट्रीय खेल होने के बावजूद भी आज हॉकी अपनी एक पहचान नही बना पाया है आज हर बच्चे, बड़े, सब क्रिकेट को पसंद करते है कोई भी हॉकी में रूचि नही रखना चाहता है चलिए यहा तक तो ठीक था पर ये किसको पता था की हिंदुस्तान की हॉकी को ये भी दिन देखना था जी हा अब हिंदुस्तान में हॉकी की वो दुर्दशा हो जायेगी जिसकी परिकल्पना भी नही की जा सकती है इंडियन प्रेमिएर लीग का हिंदुस्तान में सिर्फ़ क्रिकेट में रूचि दिखाना ये हॉकी के लिए नुकसानदायक है अब इस बात से अंदाजा लगा लीजिये की इसमे लगभग हर खिलाड़ी को करोड़ में रखा जा रहा है हर खिलाड़ी अब करोड़ पति हो जाएगा लेकिन हमारे हॉकी के खिलाड़ी की कोई सुध लेना वाला नही है आज अकेले धोनी को ६ करोड़ में बुक किया गया और शायद बहुत बड़ी बात नही होगी की हॉकी के सभी खिलाडियों का पेमेंट को जोडा जाए तो भी इतनी नही होगी जितना अकेले ये खिलाड़ी पायेगा आख़िर ऐसी क्या वजह है आज हर व्यक्ति सचिन, द्रविड़,सौरव को तो जनता है पर अगर उनसे ध्यानचंद या धनराज पिल्लै के बारे में पूछ ले तो उन्हें अचरज हो की ये कौन है और शयद ये हकीक़त भी है आज इन खिलाडियों को कोई भी नही जानता होगा हिंदुस्तान में किसी भी खेल के साथ इन्साफ तभी होगा जब बड़े बड़े उद्योगपति सब खेलो में अपनी रूचि दिखाए अभी कुछ दिनों पहले आई फ़िल्म चक दे इंडिया का बड़ा बोलबाला रहा हर दुसरे आदमी की जबान पर चक दे और साह्रुख खान का नाम था लेकिन क्या हुआ अब हर आदमी लगभग लगभग चक दे इंडिया को भूल चूका है इस फ़िल्म के आने से पहले शायद नेगी जी को कोई नही जनता होगा की इस खिलाड़ी का हॉकी में अहम् योगदान रहा है, खैर अब लोग इनको जान गए पर सवाल किसी एक खिलाड़ी को जानने का नही है यहा पर समस्या है हिंदुस्तान के रास्ट्रीय खेल हॉकी को लेकर जिस पर हमारी सरकार भी ध्यान नही दे रही है आज जहा क्रिकेट को लेकर अरबो की बोली लग रही है वही हॉकी को कोई लाखो में भी पूछने वाला नही है आज क्रिकेट का हर खिलाड़ी विज्ञापन करता मिल जाएगा पर कभी आप किसी हॉकी के खिलाड़ी को किसी विज्ञापन में देखते हुए नही पाएंगे आज भले सहरुख खान चक दे में हॉकी को प्रमोते करते हुए नज़र आए पर उनका इन्ट्रेस्ट भी क्रिकेट में है ये बात बिल्कुल साफ हो गई है, कोई कुछ भी कहे लेकिन अगर इतनी बड़ी बड़ी हस्तिया सिर्फ़ क्रिकेट को ही सुप्पोर्ट करे तो जाहिर सी बात है किसी और खेल के खिलाड़ी का मनोबल तो टूटेगा ही और यही कारन है की आज हॉकी अपना वर्चस्व नही कायम कर पा रहा है हिंदुस्तान की सरकार अगर समय रहते नही चेती और यही सब चलता रहा तो वो दिन दूर नही जब हिंदुस्तान से हॉकी का नाम मिट जाएगा और शायद हमारी आने वाली जनरेशन इसको सिर्फ़ इतिहास के पन्नों में पड़ेगी !

Posted By :- Akshat Saxena

Date:- 03-03-08